सोनीपत: ब्लड कैंसर जिसे कभी जानलेवा बीमारी माना जाता था,
आज आधुनिक चिकित्सा में हुई बड़ी प्रगति के कारण काफी हद तक ट्रीटेबल हो गया है। अर्ली डिटेक्शन,
सही डायग्नोसिस और पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट ने मरीजों के इलाज के नतीजों को बेहतर बनाया है। ब्लड कैंसर तब होता है जब खून की असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और स्वस्थ ब्लड सेल्स की जगह ले लेती हैं,
जिससे इम्युनिटी कमजोर हो जाती है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल,
द्वारका की सीनियर कंसल्टेंट डॉ.
प्रतिभा धीमान के अनुसार,
ब्लड कैंसर मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है—ल्यूकेमिया,
लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा। इनके लक्षणों में लगातार थकान,
बार-बार संक्रमण,
बुखार,
सूजन,
हड्डियों में दर्द और वजन कम होना शामिल हैं।
इलाज में कीमोथेरेपी,
इम्युनोथेरेपी,
टार्गेटेड थेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट अहम भूमिका निभाते हैं। स्टेम सेल ट्रांसप्लांट खराब बोन मैरो को स्वस्थ सेल्स से बदलकर शरीर की इम्युनिटी को दोबारा मजबूत करता है। सही इलाज और देखभाल से मरीज सामान्य जीवन की ओर लौट सकते हैं।


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