जीपीएस जैसी न्यूरो-नेविगेशन तकनीक से ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में आई नई सटीकता

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जीपीएस जैसी न्यूरो-नेविगेशन तकनीक से ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में आई नई सटीकता

जीपीएस जैसी न्यूरो-नेविगेशन तकनीक से ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में आई नई सटीकता

हल्दवानी: जब भी ब्रेन सर्जरी की बात आती हैतो अधिकतर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि यह बेहद जोखिम भरी प्रक्रिया हैजिसमें स्वस्थ ब्रेन टिश्यू को नुकसान पहुँचने की आशंका रहती है। हालांकिब्रेन ट्यूमर की सर्जरी आज भी मेडिकल साइंस की सबसे नाज़ुक सर्जरी में गिनी जाती हैलेकिन नई टेक्नोलॉजी ने इसे पहले से कहीं ज़्यादा सुरक्षित और सटीक बना दिया है। ऐसी ही एक आधुनिक तकनीक है न्यूरो-नेविगेशनजिसे अक्सर ब्रेन के लिए जीपीएस कहा जाता है। 


न्यूरो-नेविगेशन एक कंप्यूटर-असिस्टेड टेक्नोलॉजी हैजो सर्जरी के दौरान सर्जन को ब्रेन के भीतर सही दिशा और रास्ता दिखाती है। जैसे कार में लगा जीपीएस ड्राइवर को सबसे सुरक्षित और छोटा रास्ता बताता हैवैसे ही न्यूरो-नेविगेशन न्यूरोसर्जन को ब्रेन ट्यूमर तक पहुँचने के लिए सबसे सटीक और सुरक्षित सर्जिकल पाथ प्लान करने में मदद करता है। 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलवैशाली के न्यूरोसर्जरी (ब्रेन एंड स्पाइनविभाग के एसोसिएट डायरेक्टरडॉ. ऋषिकेश चक्रवर्ती ने बताया“MRI या CT इमेजिंग की मदद से न्यूरो-नेविगेशन मरीज के ब्रेन का एक डिटेल्ड थ्री-डायमेंशनल मैप तैयार करता हैजो सर्जरी के दौरान रियल-टाइम में सर्जन को गाइड करता है। इससे किसी भी चीरा लगाने से पहले ट्यूमर की सटीक लोकेशन का पता चल जाता हैहेल्दी ब्रेन टिश्यू को कम से कम प्रभावित करते हुए सबसे सुरक्षित रास्ता चुना जा सकता है और पूरी सर्जरी के दौरान इंस्ट्रूमेंट्स की मूवमेंट पर लगातार नज़र रखी जा सकती है।” 


एक गाइड की तरह काम करते हुए न्यूरो-नेविगेशन अनुमान पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर देता है। सर्जन साफ-साफ देख सकता है कि ट्यूमर कहाँ से शुरू होता है और कहाँ खत्म होता हैसाथ ही उसके आसपास मौजूद ब्लड वेसल्स और सेंसिटिव ब्रेन एरियाज़ भी दिखाई देते हैं। इससे सर्जरी के बाद बोलने में दिक्कतकमजोरी या दृष्टि हानि जैसी जटिलताओं का रिस्क कम हो जाता है। इसके अलावाट्यूमर को पूरी तरह निकालने की संभावना भी बढ़ती हैजो रिक्रेन्स को रोकने और लॉन्ग-टर्म सर्वाइवल के लिए बेहद ज़रूरी है। 


डॉ. ऋषिकेश ने आगे कहा, “न्यूरो-नेविगेशन हेल्दी ब्रेन टिश्यू को होने वाले नुकसान के खतरे को काफी कम कर देता हैजिससे ब्रेन ट्यूमर सर्जरी अधिक सुरक्षित और कंट्रोल्ड बनती है। बेहतर सर्जिकल प्रिसिशन के कारण ऑपरेशन का समय कम होता हैब्लड लॉस घटता हैरिकवरी तेज़ होती है और न्यूरोलॉजिकल फंक्शन बेहतर तरीके से सुरक्षित रहता है। यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए बहुत उपयोगी हैजिनका ट्यूमर ब्रेन के गहरे हिस्सों में या उन एरियाज़ के पास होता है जो महत्वपूर्ण फंक्शंस को कंट्रोल करते हैं। हालांकि हर केस में इसकी ज़रूरत नहीं होतीलेकिन कई मरीजों के लिए यह इलाज को ज़्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाती है।” 


कुल मिलाकरन्यूरो-नेविगेशन न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। ब्रेन के लिए जीपीएस की तरह काम करते हुए यह सर्जन को सही प्लानिंगक्रिटिकल स्ट्रक्चर्स से बचाव और ट्यूमर तक बेहद सटीक पहुँच बनाने में मदद करती है। मरीजों के लिए इसका मतलब है अधिक सुरक्षित सर्जरीबेहतर रिकवरी और जीवन की गुणवत्ता में सुधार।

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