डायबिटीज़ और हाई बीपी बना रहे हैं किडनी रोग को जानलेवा

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डायबिटीज़ और हाई बीपी बना रहे हैं किडनी रोग को जानलेवा

डायबिटीज़ और हाई बीपी बना रहे हैं किडनी रोग को जानलेवा

अलीगढ: क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD) यानी किडनी को लंबे समय तक होने वाला नुकसानआज भारत में तेज़ी से बढ़ती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। देश में अब 13.8 करोड़ से अधिक वयस्क इससे प्रभावित हैं और इस मामले में भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। युवा से लेकर बुज़ुर्ग तक किडनी फेल होने की परेशानी से जूझ रहे हैं। 


शुरुआती 2010 के दशक में जहाँ इसके मामले लगभग 11 प्रतिशत थेवहीं आज यह आंकड़ा 16 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर हैजहाँ इसकी दर करीब 15 प्रतिशत हैजबकि शहरों में यह लगभग 11 प्रतिशत है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गएतो 2040 तक CKD भारत में मौत के शीर्ष पाँच कारणों में शामिल हो सकती है और हर साल पाँच लाख से ज़्यादा जानें जा सकती हैं। 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलपटपड़गंज के  नेफ्रोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंटडॉ. रवि कुमार सिंहने बताया “इस बीमारी के तेज़ी से बढ़ने के पीछे सबसे बड़े कारण डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर हैंजिनसे लगभग एक-तिहाई मामले जुड़े होते हैंजिसे डायबिटिक किडनी डिज़ीज़ कहा जाता है। भारत में आज 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज़ और करीब 20 करोड़ लोग हाई बीपी से पीड़ित हैंऔर ये आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। शहरी जीवनशैली भी इस समस्या को बढ़ा रही है। लंबे समय तक बैठकर काम करनामोटापानमक और चीनी से भरपूर फास्ट फूडअस्वस्थ फैटलंबा ट्रैवल और काम का तनाव शरीर पर बुरा असर डालते हैं। इसके अलावाभारत का बढ़ता एयर पॉल्यूशन भी एक अहम कारण है। ट्रैफिकफैक्ट्रियों और पराली जलाने से निकलने वाले सूक्ष्म कण खून में जाकर सूजन पैदा करते हैंजिससे किडनी को नुकसान तेज़ी से बढ़ता है। स्मोकिंगखराब डाइट से होने वाली एनीमियाबिना सलाह के दर्द की दवाओं का ज़्यादा इस्तेमाल और यूरिन इन्फेक्शन जैसी समस्याएँ भी जोखिम बढ़ाती हैं। दुखद बात यह है कि ज़्यादातर लोग झागदार पेशाबटखनों में सूजन या लगातार थकान जैसे शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और तब डॉक्टर के पास पहुँचते हैं जब डायलिसिस की नौबत आ जाती है।“ 


हालांकि राहत की बात यह है कि कुछ आसान और रोज़मर्रा के बदलावों से इस बीमारी को रोका जा सकता है। सबसे पहले अपने खाने पर ध्यान दें। रोज़ाना नमक की मात्रा 5 ग्राम से कम रखें और नमकीनअचार जैसी चीज़ों से बचें। मीठे सॉफ्ट ड्रिंक्स की जगह पानी या छाछ पिएँ। ताज़ी सब्ज़ियाँफल और साबुत अनाज जैसे दाल और रोटी को अपने भोजन में शामिल करें। हर दिन कम से कम 30 मिनट तेज़ चलना या हल्का योग भी बहुत फायदेमंद है। तंबाकू और सिगरेट से पूरी तरह दूरी बनाना किडनी की सेहत के लिए बेहद ज़रूरी है। 


डॉ. रवि ने आगे बताया  “जिन लोगों को डायबिटीज़हाई बीपी है या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास रहा हैउन्हें बिना देर किए जाँच करानी चाहिए। एक साधारण ब्लड टेस्ट से क्रिएटिनिन और eGFR की जानकारी मिल जाती है और पेशाब की जाँच से प्रोटीन का पता चल जाता है। शुरुआती स्टेज में पकड़ी गई CKD को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। आज भारत की किडनियाँ खतरे में हैंलेकिन सही जानकारी और समय पर कदम उठाकर लाखों ज़िंदगियाँ बचाई जा सकती हैं। परिवारों को चाहिए कि वे खुलकर बात करेंघर पर बीपी चेक करेंशुगर कंट्रोल में रखें और साल में एक बार डॉक्टर से ज़रूर मिलें।“ 


नेफ्रोलॉजिस्ट मरीजों की मदद के लिए उपलब्ध हैंलेकिन असली बदलाव तब आता है जब आज से सेहत को प्राथमिकता दी जाती है। स्वस्थ किडनी का मतलब है अधिक त्योहारनाती-पोतों की शादियाँ और जीवन के कई खुशहाल साल। आइएमिलकर इस बढ़ते खतरे को रोकें—हमारा भविष्य इसी पर निर्भर करता है।

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