भिवानी- कमर दर्द आज एक आम समस्या बन गया है। लंबे समय तक बैठना, गलत पोस्चर, मांसपेशियों में खिंचाव या ज्यादा मेहनत करने की वजह से होने वाला दर्द अक्सर आराम, दवा और फिजियोथेरेपी से ठीक हो जाता है। लेकिन हर कमर दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कुछ मामलों में दर्द के साथ ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं, जो रीढ़ की हड्डी या नसों से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के न्यूरोसर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. अभिषेक कट्याल ने बताया, “अगर कमर का दर्द पैरों तक फैल रहा है, साथ में सुन्नपन, झनझनाहट या कमजोरी महसूस हो रही है, तो न्यूरोस्पाइन विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी हो सकता है। खासतौर पर ऐसा दर्द जो कमर से शुरू होकर नितंब, जांघ या पैर तक जाता है, जिसे आमतौर पर साइटिका कहा जाता है, नस पर दबाव का संकेत हो सकता है।
अगर चलने में परेशानी, शरीर का संतुलन बिगड़ना, पैर उठाने में दिक्कत या पैर में लगातार कमजोरी हो रही हो, तो भी जांच जरूरी है। इसी तरह 6 से 12 सप्ताह तक इलाज, आराम और फिजियोथेरेपी के बावजूद दर्द बना रहे, तो विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
डॉ. कट्याल ने आगे बताया कि "कुछ लक्षणों में तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है। कमर दर्द के साथ पेशाब या मल पर नियंत्रण खत्म होना, पेशाब करने में असमर्थता, जांघों के बीच वाले हिस्से में सुन्नपन या पैरों में अचानक कमजोरी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।"
ज्यादातर कमर दर्द बिना सर्जरी के ठीक हो सकता है। दवा, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिल सकती है। लेकिन नस पर दबाव, स्पाइनल स्टेनोसिस, रीढ़ की हड्डी में अस्थिरता या गंभीर डिस्क समस्या में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। मरीज की जांच और MRI, CT या X-ray जैसी रिपोर्ट के आधार पर माइक्रोडिस्केक्टॉमी, डीकंप्रेशन, स्पाइनल फ्यूजन या एंडोस्कोपिक सर्जरी जैसे विकल्प चुने जाते हैं।
इसलिए कमर दर्द को केवल सामान्य थकान समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज न करें। सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेने से समस्या की पहचान और उचित इलाज समय पर शुरू किया जा सकता है।



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