पानीपत: ब्लड कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में डर और अनिश्चितता पैदा हो जाती है, लेकिन बढ़ती जागरूकता, बेहतर जांच तकनीकों और उपचार में हुई प्रगति ने इस बीमारी को समझने और इसके प्रभावी प्रबंधन की संभावनाओं को काफी बढ़ाया है। ब्लड कैंसर कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि रक्त, बोन मैरो या लसीका तंत्र को प्रभावित करने वाले कैंसर का एक समूह है।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, द्वारका के बीएमटी एवं हेमेटो ऑन्कोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रतिभा धीमान ने बताया “ब्लड कैंसर के कुछ प्रकार धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जबकि कुछ तेजी से बढ़ सकते हैं। शुरुआती लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे दिखाई देने के कारण कई बार नजरअंदाज हो जाते हैं। लगातार थकान, बार-बार संक्रमण होना, बिना किसी स्पष्ट कारण के बुखार या वजन कम होना, शरीर पर असामान्य नीले निशान या रक्तस्राव, लिम्फ नोड्स में सूजन, हड्डियों या जोड़ों में लगातार दर्द, रात में अधिक पसीना आना या एनीमिया से जुड़े लक्षण ऐसे संकेत हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए।
ब्लड कैंसर को लेकर सबसे आम मिथकों में से एक यह है कि इसका मतलब हमेशा मृत्यु होता है। वास्तव में, यह एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन उपचार की सफलता बीमारी के प्रकार और उपप्रकार, उसके जैविक गुणों, मरीज के स्वास्थ्य और उपचार के प्रति प्रतिक्रिया जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। आज कीमोथेरेपी के साथ टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट जैसी उपचार पद्धतियों ने कई मरीजों के लिए उपचार के विकल्पों का विस्तार किया है।
डॉ. प्रतिभा ने आगे बताया “एनीमिया को ब्लड कैंसर का पर्याय मानना भी सही नहीं है। एनीमिया पोषण संबंधी कमी सहित कई कारणों से हो सकता है और केवल इसके आधार पर कैंसर का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसी तरह ब्लड कैंसर संक्रामक नहीं है और यह छूने, साथ बैठने, भोजन साझा करने या सामान्य सामाजिक संपर्क से नहीं फैलता। मरीजों को अलग-थलग करने के बजाय परिवार और समाज के सहयोग एवं समझ की आवश्यकता होती है।
ब्लड कैंसर के उपचार का भी कोई एक तरीका नहीं है। बीमारी के प्रकार और उसकी विशेषताओं के आधार पर कीमोथेरेपी, टार्गेटेड दवाएं, इम्यूनोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन या इनके संयोजन का इस्तेमाल किया जा सकता है।



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