कैंसर के इलाज में नई उम्मीद बनकर उभरी सेलुलर थेरेपी

Ticker

15/recent/ticker-posts

कैंसर के इलाज में नई उम्मीद बनकर उभरी सेलुलर थेरेपी

कैंसर के इलाज में नई उम्मीद बनकर उभरी सेलुलर थेरेपी

आगरा: कई वर्षों से कैंसर के उपचार में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी प्रमुख विकल्प रहे हैं। हालांकि ये उपचार आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां सेलुलर थेरेपी जैसी उन्नत तकनीकें कैंसर के इलाज को अधिक प्रभावी और लक्षित बना रही हैं। यह आधुनिक उपचार पद्धति शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उन्हें नष्ट करने में मदद करती है। 


सेलुलर थेरेपी विशेष रूप से कुछ प्रकार के रक्त संबंधी कैंसरों के उपचार में नई संभावनाएं लेकर आई है। यह उन मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण बन रही है, जिनमें पारंपरिक उपचार अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए हैं। इस तकनीक में शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को एकत्रित कर उन्हें संशोधित या अधिक सक्षम बनाया जाता है ताकि वे कैंसर कोशिकाओं को बेहतर तरीके से पहचानकर उन पर हमला कर सकें। पारंपरिक उपचारों के विपरीत, जो कई बार स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं, सेलुलर थेरेपी का उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को अधिक सटीकता से निशाना बनाना होता है। 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के हेमेटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. फरान नईम ने बतायासेलुलर थेरेपी के सबसे उन्नत रूपों में CAR-T सेल थेरेपी और बाइस्पेसिफिक इम्यूनोथेरेपी शामिल हैं, जिन्होंने दुनिया भर में कैंसर उपचार की दिशा बदल दी है। CAR-T (काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल) थेरेपी एक व्यक्तिगत उपचार है, जिसमें मरीज के शरीर से टी-सेल्स नामक श्वेत रक्त कोशिकाओं को निकाला जाता है। इन कोशिकाओं को विशेष प्रयोगशाला में आनुवंशिक रूप से इस प्रकार संशोधित किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद विशेष प्रोटीन को पहचान सकें। इसके बाद इन संशोधित कोशिकाओं की संख्या बढ़ाकर उन्हें दोबारा मरीज के शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है। शरीर में पहुंचने के बाद ये कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं को खोजकर उन पर सटीक हमला करती हैं। यह थेरेपी विशेष रूप से ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा जैसे रक्त कैंसरों में प्रभावी साबित हुई है, खासकर उन मरीजों में जिनकी बीमारी दोबारा लौट आई हो या पहले के उपचारों का पर्याप्त असर न हुआ हो।“ 


दूसरी ओर, बाइस्पेसिफिक इम्यूनोथेरेपी भी कैंसर उपचार में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। इसमें उपयोग होने वाली विशेष एंटीबॉडी एक साथ दो अलग-अलग लक्ष्यों से जुड़ सकती हैं—एक कैंसर कोशिका पर और दूसरी प्रतिरक्षा कोशिका पर। इस प्रकार वे दोनों के बीच एक पुल का कार्य करती हैं, जिससे प्रतिरक्षा कोशिकाएं सीधे कैंसर कोशिकाओं के संपर्क में आकर उन्हें अधिक प्रभावी ढंग से नष्ट कर पाती हैं। CAR-T थेरेपी के विपरीत, इसमें मरीज की कोशिकाओं को निकालकर संशोधित करने की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए यह कई मामलों में एक तैयार उपचार विकल्प के रूप में उपलब्ध होती है। मरीज के कैंसर के प्रकार और उसकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर यह एक उपयुक्त विकल्प हो सकता है। 


डॉ. फरान ने आगे बताया “CAR-T सेल थेरेपी और बाइस्पेसिफिक इम्यूनोथेरेपी दोनों ही प्रिसिजन मेडिसिन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। ये उपचार उन मरीजों के लिए नई संभावनाएं लेकर आए हैं, जिन्होंने पारंपरिक उपचारों के अधिकांश विकल्पों का उपयोग कर लिया है। हालांकि, हर मरीज इन उपचारों के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसलिए उपचार शुरू करने से पहले अनुभवी कैंसर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक है। अन्य चिकित्सा उपचारों की तरह इन थेरेपी से भी कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिनकी निगरानी प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए। सेलुलर थेरेपी का क्षेत्र लगातार विकसित हो रहा है और शोधकर्ता इसके उपयोग को विभिन्न प्रकार के कैंसरों तक विस्तारित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।“ 


वैज्ञानिक प्रगति के साथ भविष्य में अधिक मरीजों को ऐसे व्यक्तिगत और लक्षित उपचारों का लाभ मिल सकता है, जो न केवल अधिक प्रभावी हों बल्कि बेहतर परिणाम भी प्रदान करें। आज सेलुलर थेरेपी केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि कैंसर मरीजों और उनके परिवारों के लिए आशा का एक मजबूत प्रतीक बन चुकी है, जो हमें ऐसे भविष्य की ओर ले जा रही है जहां कैंसर का उपचार अधिक सटीक, प्रभावी और सफल हो सके।

💡 Enjoying the content?

For getting latest content, Please Follow us.

Follow Us