सोनीपत: आज मोटापा केवल शरीर के बढ़ते वजन या सुंदरता से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि इसे एक दीर्घकालिक बीमारी के रूप में देखा जाता है, जिसका स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। मोटापा मधुमेह, हृदय रोग, फैटी लिवर, बांझपन और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी कई बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए वजन कम करने की शुरुआत केवल डाइटिंग से नहीं, बल्कि मोटापे का सही आकलन, उसके कारणों की समझ और व्यक्ति की जरूरत के अनुसार उपलब्ध उपचार विकल्पों के चयन से होनी चाहिए।
मोटापे को आमतौर पर बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। भारतीय संदर्भ में बीएमआई 23 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर या उससे अधिक होने पर व्यक्ति को अधिक वजन की श्रेणी में माना जा सकता है, जबकि 25 से 29.9 के बीच बीएमआई मोटापे की श्रेणी में आता है। 30 से 34.9 बीएमआई को क्लास I, 35 से 39.9 को क्लास II और 40 या उससे अधिक बीएमआई को क्लास III या गंभीर मोटापे की श्रेणी में रखा जाता है।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली (गाजियाबाद) के मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मिनिमल एक्सेस, बैरिएट्रिक एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं हेड, डॉ. विवेक बिंदल ने बताया वजन प्रबंधन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी जीवनशैली में बदलाव है। संतुलित और प्रोटीन से भरपूर आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव का बेहतर प्रबंधन वजन कम करने की प्रक्रिया की मजबूत नींव तैयार करते हैं। इन बदलावों से न केवल वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। हालांकि, कई लोगों में लंबे समय से चली आ रही आदतों और शरीर की जैविक प्रवृत्तियों के कारण केवल डाइट और एक्सरसाइज से अपेक्षित वजन कम करना संभव नहीं हो पाता।
जिन लोगों का बीएमआई 30 से 35 के बीच है, उनके लिए कुछ मामलों में एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं भी एक न्यूनतम इनवेसिव विकल्प हो सकती हैं। इंट्रागैस्ट्रिक बैलून और एंडोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रोप्लास्टी (ESG) जैसी प्रक्रियाओं का उद्देश्य पेट की क्षमता को कम करना है, जिससे अधिक खाने की प्रवृत्ति नियंत्रित होती है और वजन कम करने में मदद मिल सकती है। इन प्रक्रियाओं में बाहरी चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं होती और उपयुक्त मरीजों में ये वजन प्रबंधन के लिए प्रभावी विकल्प हो सकती हैं।
डॉ. बिंदल ने आगे बताया “गंभीर मोटापे, विशेषकर 35 या उससे अधिक बीएमआई वाले लोगों में, बैरिएट्रिक और मेटाबॉलिक सर्जरी लंबे समय तक वजन कम करने के प्रभावी विकल्पों में शामिल हैं। आधुनिक लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक तकनीकों ने इन प्रक्रियाओं को अधिक सटीक और कम इनवेसिव बनाया है तथा मरीजों को अपेक्षाकृत तेजी से रिकवरी में मदद मिल सकती है। स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी और गैस्ट्रिक बायपास जैसी सर्जरी न केवल लंबे समय तक वजन कम करने में मदद करती हैं, बल्कि कई मरीजों में मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी मोटापे से जुड़ी बीमारियों में भी सुधार देखा जाता है।
वजन कम करने के लिए कोई एक ऐसा उपचार नहीं है जो हर व्यक्ति के लिए समान रूप से प्रभावी हो। कुछ लोगों को केवल जीवनशैली में बदलाव से लाभ मिल सकता है, जबकि अन्य को दवाओं, एंडोस्कोपिक प्रक्रियाओं या सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।



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