मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली में 650 ग्राम का नन्हा शिशु जिंदगी की जंग जीतकर घर लौटा

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मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली में 650 ग्राम का नन्हा शिशु जिंदगी की जंग जीतकर घर लौटा

मैक्स हॉस्पिटल, वैशाली में 650 ग्राम का नन्हा शिशु जिंदगी की जंग जीतकर घर लौटा

डॉक्टरों ने केवल 650 ग्राम वज़न और 26 हफ्ते में जन्मे नवजात शिशु की ज़िंदगी बचाई गई 

गाज़ियाबाद, 25 अगस्त 2025: मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के डॉक्टरों ने मात्र 26 हफ्ते में जन्मे और केवल 650 ग्राम वज़न वाले एक अति समयपूर्व (प्रिमैच्योर) शिशु की ज़िंदगी सफलतापूर्वक बचाई। जन्म के समय शिशु को तुरंत कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) की आवश्यकता पड़ी और उसने कई जानलेवा जटिलताओं से संघर्ष किया। 78 दिनों की गहन चिकित्सा देखभाल के बाद शिशु को पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य न्यूरोलॉजिकल स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई—जो दुनिया के सबसे एडवांस्ड टर्शरी केयर सेंटर्स में भी बहुत ही दुर्लभ परिणाम है।


गंभीर हालत में पैदा हुए इस शिशु की ज़िंदगी तुरंत इलाज और आधुनिक नवजात देखभाल पर निर्भर थी। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली की नवजात विशेषज्ञ टीम ने तुरंत सर्फेक्टेंट थेरेपी (फेफड़ों के पूरी तरह विकसित न होने पर दी जाने वाली जीवनरक्षक चिकित्सा), मैकेनिकल वेंटिलेशन और डोनर मिल्क फ़ीडिंग शुरू की, जिससे शिशु शुरुआती महत्वपूर्ण घंटों में जीवित रह सका। 


अगले 11 हफ्तों के दौरान, शिशु का सेप्सिस और रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (आरओपी) जैसी गंभीर स्थितियों का इलाज किया गया, जो समय से पहले जन्मे शिशुओं में आम तौर पर जानलेवा साबित हो सकती हैं। तमाम कठिनाइयों के बावजूद, शिशु ने अद्भुत रूप से स्वस्थ होकर पूरी तरह सामान्य सांस लेते हुए और मुंह से दूध पीते हुए अस्पताल से छुट्टी पाई, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उसके मस्तिष्क पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ा।


इस मामले पर बोलते हुए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में नियोनेटोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट - डॉ. आनंद सिंह ने कहा, “केवल 650 ग्राम वज़न वाले एक अति प्रिमैच्योर शिशु को बचाना वास्तव में असाधारण उपलब्धि है। एडवांस्ड नवजात तकनीक, चौबीसों घंटे की सतर्कता और टीमवर्क से ही ऐसे मामलों में जीवित रहते हुए सामान्य न्यूरोलॉजिकल विकास संभव हो पाता है। यह केस दर्शाता है कि जब आधुनिक चिकित्सा करुणामयी देखभाल के साथ मिलती है, तो चमत्कार संभव हो जाते हैं।” 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के पीडियाट्रिक्स विभाग के सीनियर कंसलटेंट - डॉ. नरेंद्र झा ने कहा, “एनआईसीयू में हर दिन इस छोटे योद्धा के लिए संघर्ष भरा था। उसका स्वस्थ होना उसकी हार न मानने वाली ताक़त, माता-पिता के विश्वास और हमारी डॉक्टर, नर्स व एनआईसीयू टीम की अथक मेहनत का परिणाम है। इस नन्हे शिशु को स्वस्थ घर जाते देखना हमारे लिए अपार खुशी का क्षण है।” 


इस अत्यंत प्रिमैच्योर शिशु के सफल प्रबंधन ने मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, वैशाली की विश्वस्तरीय नवजात एवं बाल चिकित्सा सेवाओं को एक बार फिर प्रमाणित किया है। यह केस न केवल नवजात चिकित्सा में एक नई मिसाल कायम करता है बल्कि सबसे नाज़ुक जीवन को बचाने की हमारी प्रतिबद्धता को भी और मज़बूत करता है।

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