*प्रयागराज*: “मुझे सर्वाइकल है” — ओपीडी में सुनने को मिलने वाली यह सबसे आम शिकायतों में से एक है। मरीज अक्सर गर्दन में दर्द, अकड़न, चक्कर या हाथों तक पहुंचने वाले दर्द के लिए ‘सर्वाइकल’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, ‘सर्वाइकल’ अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। मेडिकल भाषा में यह गर्दन की सर्वाइकल स्पाइन को संदर्भित करता है। इसमें सात वर्टिब्रा यानी रीढ़ की हड्डियां होती हैं, जो सिर को सहारा देने के साथ-साथ स्पाइनल कॉर्ड की सुरक्षा करती हैं और सिर व गर्दन की गतिविधियों को संभव बनाती हैं।
सर्वाइकल वर्टिब्रा को C1 से C7 तक नंबर दिए जाते हैं। C1 को एटलस कहा जाता है, जो सिर की खोपड़ी को सहारा देता है, जबकि C2 को एक्सिस कहा जाता है। यह C1 के साथ एक महत्वपूर्ण जोड़ बनाता है और सिर को घुमाने में अहम भूमिका निभाता है। ऊपरी सर्वाइकल स्पाइन ब्रेनस्टेम और स्पाइनल कॉर्ड के काफी करीब होती है, इसलिए इस हिस्से में होने वाली चोट कुछ मामलों में गंभीर हो सकती है। C2 वर्टिब्रा के कुछ फ्रैक्चर, खासकर उसके पार्स इंटरआर्टिकुलरिस से जुड़े फ्रैक्चर को “हैंगमैन फ्रैक्चर” कहा जाता है। यह एक ऐतिहासिक शब्द है, जिसका इस्तेमाल सर्वाइकल स्पाइन में होने वाली एक विशेष प्रकार की चोट के लिए किया जाता है।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत के न्यूरोसर्जरी विभाग के वाइस चेयरमैन एवं एचओडी और न्यूरो इंटरवेंशन विभाग के यूनिट हेड डॉ. (प्रो.) दलजीत सिंह ने बताया “सर्वाइकल स्पाइन को प्रभावित करने वाली सबसे आम समस्याओं में से एक सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस है। यह एक डीजेनेरेटिव प्रक्रिया है, जो उम्र बढ़ने के साथ डिस्क, वर्टिब्रा और उन्हें सहारा देने वाली संरचनाओं में होने वाले बदलावों और घिसावट से जुड़ी होती है। हालांकि इसे पारंपरिक रूप से उम्र से संबंधित समस्या माना जाता रहा है, लेकिन अब यह कम उम्र के लोगों में भी तेजी से देखने को मिल रही है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने, गलत पॉश्चर, लगातार बैठे रहने वाली जीवनशैली और गर्दन पर बार-बार पड़ने वाला स्ट्रेन इसके जोखिम को बढ़ा सकता है। सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, सर्वाइकल डिस्क प्रोलैप्स से अलग होता है, जिसे आम बोलचाल में “स्लिप्ड डिस्क” कहा जाता है। डिस्क प्रोलैप्स में रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क बाहर की ओर उभर सकती है या हर्निएट हो सकती है और आसपास की नसों पर दबाव डाल सकती है। यह समस्या डिस्क में होने वाले डीजेनेरेशन, चोट, अत्यधिक स्ट्रेन, वजन उठाने या शरीर की गलत बायोमैकेनिक्स के कारण हो सकती है।“
सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी समस्याओं के लक्षणों में गर्दन में दर्द, अकड़न, कंधे या हाथ तक जाने वाला दर्द, हाथों में सुन्नपन, झनझनाहट और कमजोरी शामिल हो सकते हैं। कुछ मरीजों को सिरदर्द या चक्कर की शिकायत भी हो सकती है। कुछ मामलों में निगलने में परेशानी या शरीर का संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। खासतौर पर जब इनके साथ न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी मौजूद हों, तो इनकी गंभीरता से जांच जरूरी हो जाती है।
डॉ. (प्रो.) दलजीत ने आगे बताया “जांच की शुरुआत मरीज की विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री, क्लिनिकल जांच और न्यूरोलॉजिकल फंक्शन के आकलन से होती है। लक्षणों और संभावित समस्या के आधार पर डॉक्टर सर्वाइकल स्पाइन का एक्स-रे, CT स्कैन या MRI कराने की सलाह दे सकते हैं। इन जांचों से समस्या की सही जगह और उसकी गंभीरता का पता लगाने में मदद मिलती है। अच्छी बात यह है कि सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी अधिकांश समस्याओं का शुरुआती स्तर पर बिना सर्जरी के इलाज किया जा सकता है। इलाज में जरूरत के अनुसार गतिविधियों में बदलाव, सही तरीके से गर्दन की एक्सरसाइज, फिजियोथेरेपी और दर्द कम करने वाली दवाएं या मसल रिलैक्सेंट शामिल हो सकते हैं।“
जब कंजर्वेटिव इलाज से पर्याप्त राहत नहीं मिलती या मरीज में न्यूरोलॉजिकल समस्या गंभीर या लगातार बढ़ रही हो, जैसे हाथ-पैरों में कमजोरी या संवेदना में कमी, तब सर्जरी पर विचार किया जा सकता है। गंभीर मामलों में जब स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ता है, तो मरीज को ब्लैडर या बॉवेल फंक्शन से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। समस्या की जगह और प्रकृति के आधार पर सर्जरी गर्दन के आगे या पीछे की ओर से की जा सकती है। आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और इम्प्लांट्स की मदद से स्पाइन की स्थिरता को बहाल करने और मरीज को जल्द मोबिलाइज करने में मदद मिल सकती है। डिस्क से जुड़ी समस्या वाले उचित रूप से चुने गए मरीजों में आर्टिफिशियल डिस्क रिप्लेसमेंट भी एक विकल्प हो सकता है।
इसलिए अगली बार जब कोई कहे, “मुझे सर्वाइकल है”, तो यह समझना जरूरी है कि ‘सर्वाइकल’ रीढ़ के एक हिस्से को दर्शाता है, किसी एक बीमारी को नहीं। गर्दन में दर्द के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं और इसके पीछे की वास्तविक समस्या की पहचान करना ही सही इलाज चुनने की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।



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